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मेट्रो की खिड़की (Metro Ki Khidki)
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रोज़ सुबह की मेट्रो, वही पुराना कोना
हेडफ़ोन में धुन है, आँखों में आधा सोना
सामने तू खड़ा, किताब में खोया
मैंने भी चुपके से, इक सपना बोया
अगला स्टेशन आए
और तू उतर ना जाए
मेट्रो की खिड़की में, तेरा अक्स दिखे
दिल की इस डायरी में, तेरा नाम लिखे
दो स्टेशन का रस्ता, लगे इक सफ़र
मेट्रो की खिड़की, और तेरी नज़र
कल तूने मुस्का के, सीट मुझे दे दी
उस छोटी सी बात ने, नींदें मेरी ले लीं
आज हिम्मत करके, कुछ तो कहूँगी
वरना इस खिड़की से, बस तकती रहूँगी
अगला स्टेशन आए
और तू उतर ना जाए
मेट्रो की खिड़की में, तेरा अक्स दिखे
दिल की इस डायरी में, तेरा नाम लिखे
दो स्टेशन का रस्ता, लगे इक सफ़र
मेट्रो की खिड़की, और तेरी नज़र
दरवाज़े बंद होने से पहले
कह दूँ जो दिल ये कहने को मचले
मेट्रो की खिड़की में, तेरा अक्स दिखे
दिल की इस डायरी में, तेरा नाम लिखे
दो स्टेशन का रस्ता, लगे इक सफ़र
मेट्रो की खिड़की, और तेरी नज़र